February 24, 2024

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बस कुछ पल का इंतजार, टनल से बाहर आएंगे 41 मजदूर, देश कर रहा प्रार्थना

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uttarkashi-tunnel

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Uttrakhand: उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम ‘ऑल वेदर सड़क’ (हर मौसम में आवाजाही के लिए खुली रहने वाली सड़क) परियोजना का हिस्सा है। ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही यह सुरंग 4.5 किलोमीटर लंबी है। 12 नवंबर को सुरंग का एक हिस्सा ढह गया। इससे मजदूर सुरंग के अंदर ही फंस गए. इन्हें निकलने के लिए 16 दिन से रेस्क्यू अभियान जारी है। लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिली।

वर्टिकल और मैन्युअल ड्रिलिंग

सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। ऑगर मशीन के टूटने के बाद अब वर्टिकल और मैन्युअल ड्रिलिंग की जा रही है।

रैट-होल माइनर

सिल्क्यारा सुरंग में बाकी हॉरिजेंटल खुदाई मैन्युअल विधि से की जा रही है। इसमें सुरंग बनाने में विशेष कौशल रखने वाले व्यक्तियों को चुना गया है। इन्हें रैट-होल माइनर कहा जाता है। रैट-होल माइनिंग अत्यंत संकीर्ण सुरंगों में की जाती है। कोयला निकालने के लिए माइनर्स हॉरिजेंटल सुरंगों में सैकड़ों फीट नीचे उतरते हैं। चुनौतीपूर्ण इलाकों खासकर मेघालय में कोयला निकालने के लिए इसका विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

रैट-होल माइनर प्रतिबंध है

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2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रैट-होल माइनर पर प्रतिबंध लगा दिया था। एनजीटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद, अवैध रूप से रैट-होल खनन जारी है. उत्तराखंड सरकार के नोडल अधिकारी नीरज खैरवाल ने स्पष्ट किया कि रेस्क्यू साइट पर लाए गए लोग रैट माइनर्स नहीं बल्कि इस तकनीक में विशेषज्ञ लोग हैं।

उधर, मैन्युअल हॉरिजेंटल ड्रिलिंग के लिए दो प्राइवेट कंपनियों की दो टीमों को लगाया है। एक टीम में 5 एक्सपर्ट हैं, जबकि दूसरी में 7. इन 12 सदस्यों को कई टीमों में बांटा गया है। ये टीमें बचे हुए मलबे को बाहर निकालेंगी। इसके बाद 800 एमएम व्यास का पाइप डाला जाएगा। एनडीआरएफ की टीमें इसी के सहारे मजदूरों को बाहर निकालेंगी।

बाबा बौख नाग जी सकुशल बाहर निकालेंगे

सीएम पुष्कर धामी ने एक्स पर पोस्ट किया कि सिलक्यारा पहुंचकर टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का स्थलीय निरीक्षण किया। टनल में फंसे श्रमिकों का कुशलक्षेम जाना और चिकित्सकों को श्रमिक भाइयों से निरंतर संपर्क में रहने के निर्देश दिए। सभी श्रमिक स्वस्थ एवं सुरक्षित है। बाबा बौख नाग जी से सभी श्रमिक भाइयों के सकुशल बाहर निकालने हेतु संचालित रेस्क्यू ऑपरेशन की शीघ्र सफलता की कामना करता हूं।

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वीके सिंह ने टनल का जायजा लिया

केंद्रीय मंत्री जनरल (रि.) वीके सिंह टनल में बचाव अभियान का जायजा लेने पहुंचे हैं। पहाड़ी की चोटी से 1.2 मीटर व्यास वाले पाइप के लिए 43 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग का काम पूरा हो गया है। बाकी काम पूरा होने में 40-50 घंटे और लग सकते हैं। पहाड़ी की चोटी से 8 मिमी व्यास वाले पाइप के लिए 78 मीटर की वर्टिकल ड्रिलिंग भी पूरी हो गई है। पाइपलाइन में मामूली समस्या होने के कारण आगे की ड्रिलिंग अस्थायी रूप से रोक दी गई है। सुरंग के अंदर मैनुअल ड्रिलिंग सुचारू रूप से चल रही है।

डीजीपी अशोक कुमार ने कहा

उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि सिलक्यारा, उत्तरकाशी रेस्क्यू ऑपरेशन के सम्बन्ध में सोशल मीडिया पर एक भ्रामक व असत्य खबर प्रसारित की जा रही है। यह एक आधारहीन और झूठी खबर है। सिल्क्यारा टनल में ऐसा कोई भी मजदूर नहीं फंसा है। कृपया इसे शेयर करके दुष्प्रचार न करें। ऐसी भ्रामक खबरों को फैलाने वालों के विरूद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

52 मीटर तक मिली सफलता और खुदाई बाकी

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लगभग 52 मीटर (मैन्युअल और बरमा मशीन ड्रिलिंग एक साथ) की गई है. उम्मीद है कि 57 मीटर के आसपास सफलता मिलेगी। 1 मीटर पाइप मेरे सामने धकेल दिया गया था, यदि 2 मीटर और चला गया तो ये लगभग 54 मीटर अंदर धकेल दिया जाएगा। उसके बाद, एक और पाइप का उपयोग किया जाएगा। पहले स्टील गार्डर मिल रहे हैं, यह अब कम हो गया है। कंक्रीट मिल रहा है, इसे कटर से काटा जा रहा है।

आखिरी राउंड है

उत्तरकाशी में यह रेस्क्यू का आखिरी राउंड चल रहा है। अब 2-3 मीटर की ड्रिलिंग बाकी है। उम्मीद है कि कुछ देर में खुशखबरी आ सकती है। मजदूरों को जल्द अस्पताल ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने का काम पूरा हो गया है।

 

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