April 13, 2024

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कैसे रहे मोदी सरकार के दस साल? जाने उपलब्धियां और खामियां….

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PM Modi

PM Modi

PM Modi: केंद्र की मोदी सरकार पिछले 10 सालों से देश की सत्ता सम्भाल रही है। पहली दफा 2014 में भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) सत्ता में आई और मोदी लहर की गुंज चारों ओर सुनाई देने लगी। इसके बाद 2019 में फिर से प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की और 30 मई 2019 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार पीएम पद की शपथ ली।

वहीं अगर बात करें 2019 से 2024 तक के कार्यकाल की तो इसमें मोदी सरकार ने कई उपलब्धियां हासिल की और कुछ खामियां भी रह गईं। चलिए जानते हैं विस्तार से उन उपलब्धियों और खामियों के बारे में….

देश की अर्थव्यवस्था का हाल

मोदी सरकार के आने से देश की अर्थव्यवस्था में काफी अच्छे बदलाव देखने को मिलें हैं। यह मोदी सरकार की है देन है कि भारत देश की अर्थव्यवस्था आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। भारत की जीडीपी की बात करें तो 2019 में जीडीपी 2.8 लाख करोड़ थी, यह 2023 में बढ़कर 3.7 लाख के पार पहुंची चुकी है। 2024 में 4.1 लाख करोड़ तक पहुंचने के अनुमान हैं।

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में भारत का नाम शामिल है। 2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7 फीसदी की दर से बढ़ी है। अनुमान है कि अगर इसी रफ्तार से आगे भी बढ़ती रही तो 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

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अमीर देशों में भारत का नाम नहीं

अर्थव्यवस्था में जीडीपी के मामले में भले ही भारत दुनिया के टॉप-5 देशों में शामिल हो लेकिन अमीर देशों की तुलना में भारत का नाम टॉप-100 में भी नहीं आता। वहीं पश्चिम यूरोप का एक छोटा सा देश लक्जमबर्ग दुनिया का सबसे अमीर देश है, जिसकी जीडीपी प्रति व्यक्ति आय 143,320 डॉलर है।

जीडीपी पर कैपिटा रैंकिंग के आधार पर भारत का स्थान 129वां है. भारत की जीडीपी प्रति व्यक्ति आय 2673 डॉलर (करीब 2.21 लाख रुपये) है। प्रति व्यक्ति आय मामले में भारत की स्थिति पड़ोसी देश बांग्लादेश, श्रीलंका से भी खराब है।

लेकिन जब से मोदी सरकार आई है तब से प्रति व्यक्ति आय में काफी सुधार देखने को मिला है। 2019 में देखा जाए तो जीडीपी प्रति व्यक्ति आय करीब 2000 डॉलर थी। 2014 में प्रति व्यक्ति आय 1600 अमेरिकी डॉलर थी।

डॉलर और रुपये में कितने का अतंर

डॉलर की कीमत में उतार-चढ़ाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ता है। जब डॉलर की कीमत गिरती है तो भारत के लिए विदेशी वस्तुओं का आयात सस्ता होता है। इससे भारत को फायदा होता है और महंगाई कम होती है। वहीं जब डॉलर की कीमत बढती है तो भारत से विदेशी मुद्रा में होने वाले निर्यात महंगे हो जाते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान होता है और व्यापार घाटा बढ़ जाता है।

2014 में एक डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू करीब 60 रुपये थी। 2019 में एक डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 72 तक पहुंच गया। 2021 तक आते-आते एक डॉलर 74.57 रुपये के बराबर आ गया। 2024 जनवरी-फरवरी में अब एक डॉलर की कीमत करीब 83.27 रुपए है।

इस समय अमेरिकी डॉलर को दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी माना जाता है। जिस वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गिनती दुनिया की सबसे बढ़ी अर्थव्यवस्था में होती है।

पांच सालों में महंगाई दर में बढ़ोत्तरी

2019 से 2024 के बीच महंगाई में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। दिसंबर 2023 में भारत में मुद्रास्फीति दर (Inflation Rate) 5.69 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पहले 2022 में महंगाई दर 6.7 फीसदी थी, जबकि 2019 ये दर केवल 3.73 फीसदी पर थी। यानी बीते पांच सालों में देखा जाए तो देश में महंगाई बढ़ी है।

आसमान छूते पेट्रोल-डीजल के रेट

मोदी सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल देखने को मिली है। 2019 में राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 75 रुपये और डीजल 66 रुपये प्रति लीटर पर थी। आज राजधानी में पेट्रोल 96 रुपये और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर है। कुछ शहरों में ये कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है। यानी कि पिछले पांच साल में 25 से 35 फीसदी तक पेट्रोल डीजल महंगा हुआ है।

वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों की बात करें तो वहां कच्चे तेल की कीमत कम हैं, इसके बावजूद भी भारत में तेल की कीमतें कम नहीं हुईं। वर्तमान समय में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब है।

बेरोजगारी दर कितना बढ़, कितना घटा

आज के दौर में देखा जाए तो भारत में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। युवा हर दूसरे-तीसरे दिन बेरोजगारी का मुद्दा उठा धरने पर बैठ जाते हैं। मोदी सरकार के कार्यलय में साल 2014 और 2019 के मुकाबले बेरोजगारी दर बढ़ी है। युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 5:30% से बढ़कर 2023 में 8.003% हो गई।

ताजा आंकड़ें देखें तो जनवरी 2024 में बेरोजगारी दर 16 महीने के निचले स्तर पर है। सीएमआईई के सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में बेरोजगारी दर दिसंबर 2023 में 8.7 फीसदी से घटकर जनवरी 2024 में 6.8 फीसदी हो गई। ग्रामीण और शहरी भारत दोनों जगह बेरोजगारी दर कम हुई है। ग्रामीण बेरोजगारी दर दिसंबर में लगभग 8 फीसदी से घटकर जनवरी में 5.8 फीसदी हो गई। वहीं शहरी बेरोजगारी दर पिछले महीने के 10.1 फीसदी से गिरकर 8.9 फीसदी पर आ गई।

किसानों की आय बढ़ी या घटी

किसानों की आय की बात करें तो 2012-13 से 2018-19 के बीच किसानों की आय केवल 59 फीसदी बढ़ी है। सरकार कहती है कि उन्होनें किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2012-13 में किसानों की औसतन आय 6426 रुपये प्रति माह से बढ़कर 2018-19 में 10,218 रुपये हो गई। इसके बाद सरकार तरफ से की कोई रिपोर्ट पेश नहीं हुई है।

खबरों के मुताबिक, भारत देश में मेघालय के किसानों की आय सबसे ज्यादा है। यहां किसानों के हर महीने की आमदनी 29, 348 रुपये है। इसके बाद पंजाब और हरियाणा है, जहां किसानों का आय 26,702 और 22,841 रुपये प्रति माह है। लेकिन चार राज्य ऐसे भी हैं जहां किसानों की आया घटी है। ये राज्य हैं- झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और नागालैंड।

कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने एक बयान में बताया था कि ”2022-23 में सरकार ने किसानों के कल्याण पर खर्च कई गुना बढ़ाया है। करीब 6.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए।” कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के बजट में 2013-14 के दौरान 27,662 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 125,035 करोड़ रुपये हो गया है।

विदेश नीति में कई सुधार 

मोदी सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी। नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ संबंधों में सुधार हुआ है। हालांकि 2023 में मालदीव सरकार ने भारत के साथ हुए समझौते को रद्द कर दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई। चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर तनाव बना रहा। वहीं रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच संबंधों में भारत ने अपनी तरफ से संतुलन बनाए रखने का प्रयास भी किया। जापान में रणनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ा। यूरोपीय संघ के साथ संबंधों में मजबूती आई। मोदी सरकार की ही देन है कि पड़ोसी देश में जब भी भारत के पीएम जाते हैं तो उनका स्वागत भव्य तरोके से जोरों-शोरों से होता है चारों ओर मोदी-मोदी के नारे लगते हैं।

भारत में G20 की मेजबानी

ऐसा पहली बार हुआ जब भारत ने G20 समिट की मेजबानी की। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत दुनिया के शीर्ष नेताओं का भव्य स्वागत किया। जिसमें चीन और रूस शामिल नहीं थे। 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल कराना भारत की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

मानवाधिकार उल्लंघन के मामले

मानवाधिकारों तब होता है जब किसी व्यक्ति या समूह से मौलिक अधिकार छीन लिए जाते हैं। ये अधिकार सभी मनुष्यों के लिए समान होते हैं। इन अधिकारों में शिक्षा, स्वतंत्रता, समानता, गरिमा और सुरक्षा का अधिकार शामिल है।
NHRC की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की कुल संख्या 2018-19 में 89,584 से घटकर 2019-20 में 76,628 और फिर 2020-21 में 74,968 हो गई थी। 2021 में 31 अक्तूबर तक 64,170 मामले दर्ज किए गए थे। इसमें लगभग 40 फीसदी मामले उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए थे।

महिला अपराध का क्या हाल रहा?

इसके आलावा महिला अपराधों की बात करें तो राष्ट्रीय महिला आयोग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ा है। साल 2020 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के तीन लाख 71 हजार मामले दर्ज हुए थे। 2021 में चार लाख 28 हजार केस सामने आए। फिर 2022 में ये आंकड़ा बढ़कर चार लाख 45 हजार हो गया।
महिलाओं अपराध के मामले उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। यहां 2022 में सबसे ज्यादा 65743 केस दर्ज किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र और राजस्थान में 45 हजार से ज्यादा केस देखने को मिले। ये मामले घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न, दुष्कर्म और बलात्कार के प्रयास की धाराओं के तहत दर्ज किए गए।

कोरोना महामारी से मोदी सरकार कैसे लड़ी?

जहां कोरोना के चलते देश में मातम का माहौल था। लोग डरे हुए थे उस समय पीएम ने लोगों का कई तरह से हौसला बढ़ाया बीच में लोगों से मन की बात करने आते रहे। पड़ोसी देशों की भी तमाम तरह से मदद की भारत से दवाईयां तक भेजी गई। वहीं सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और लोगों को राहत देने के लिए कई तरीके से छूट दी।

मोदी सरकार ने 16 जनवरी 2021 को दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू किया। अभियान के तहत 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को मुफ्त में टीके लगाए गए। 2023 तक 1 अरब से अधिक लोगों को पूरी तरह से टीका लगा दिया है। ऐसे गंभीर समय में भारत ने कई देशों को टीके फ्री में भी दिए। कोविड के इलाज के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं, सुविधाओं में सुधार किया गया।

देशवासियों को मुफ्त राशन

कोरोना महामारी के बाद से मोदी सरकार ने 80 करोड़ से ज्यादा देशवासियों को फ्री राशन बांट रही है। 26 मार्च 2020 को मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत देश के 80 करोड़ नागरिक को हर महीने 5 किलो से ज्यादा अनाज दिया जाता है। योजना के लिए सरकार करीब छह लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।

विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा

लेकिन विपक्ष ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि लॉकडाउन बहुत सख्त था और इसने अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया। सरकार ने कोविड को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जिस कारण लाखों लोगों की मौत हो गई।

 

 

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