April 16, 2024

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किसान आंदोलन के बीच योगी सरकार का ऐलान, 6 महीने के लिए हड़ताल बंद

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Uttar Pardesh: किसान आंदोलन के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में छह महीने के लिए हड़ताल पर पाबंदी लगा दी है। यह नियम राज्य सरकार के अधीन सरकारी विभागों, निगम और प्राधिकरण पर लागू रहेगा। योगी सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि ‘एस्मा एक्ट लगने के बाद भी अगर कोई कर्मचारी हड़ताल या प्रदर्शन करते पाया जाता है, तो हड़ताल करने वालों को एक्ट उल्लंघन के आरोप में बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाएगा।’

बिना वारंट होगी गिरफ्तार

दरअसल अपर मुख्य सचिव कार्मिश डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि ”एस्मा एक्ट लगने के बाद भी अगर कोई कर्मचारी हड़ताल या प्रदर्शन करते पाया जाता है, तो हड़ताल करने वालों को एक्ट उल्लंघन के आरोप में बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाएगा।”

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2023 में छह महीने का हड़ताल बैन

बता दें कि यूपी सरकार इससे पहले भी इस तरह का फैसला सुना चुकी है। राज्य सरकार ने 2023 में भी छह महीने के लिए हड़ताल पर बैन लगाया था। उस समय बिजली विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे।

एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट

एस्‍मा यानी एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट (Essential Services Management Act) कानून का इस्तेमाल उस वक्त किया जाता है, जब कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं। इस कानून का प्रयोग हड़ताल रोकने के लिए किया जाता है। यह कानून अधिकतम छह महीने के लिए लगाया जा सकता है।

एक साल से भी लंबा किसान आंदोलन

किसान एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं। किसान संगठनों ने 13 फरवरी को दिल्ली चलो मार्च की शुरुआत की। लेकिन पुलिस ने किसानों को दिल्ली में घुसने नहीं दिया। किसानों को पंजाब और हरियाणा बॉर्डर पर ही रोका गया है। इससे पहले केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर देश में एक साल से भी ज्यादा लंबा किसान आंदोलन चला था। ये आंदोलन 26 नवंबर 2020 से शुरू हुआ था। तब पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए थे।

फिर से करेंगे आंदोल

किसान उस समय तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर अड़े हुए थे। सालभर तक चले आंदोलन के बाद पिछले साल 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कानूनों की वापसी का ऐलान किया था। तीनों कानूनों को अब वापस लिया जा चुका है।  तीनों कानूनों की वापसी के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म किया था। हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा था कि ”उनकी और भी मांगें हैं और अगर उन्हें पूरा नहीं किया गया तो फिर से आंदोलन किया जाएगा।”

 

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