March 2, 2024

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उत्तराखंड विधानसभा में पेश हुआ UCC विधेयक, लागू होने के बाद होंगे ये बड़े बदलाव!

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Uniform Civil Code: उत्तराखंड जल्द ही समान नागरिक संहिता यानी uniform civil code लागू करने वाला राज्य बन सकता है। चार फरवरी को उत्तराखंड कैबिनेट से यूसीसी विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद उसे आज यानि मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया। अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा।

मंलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश करने के बाद राज्य विधानसभा में विधायकों ने वंदे मातरम और जय श्री राम के नारे लगाए।

बता दें कि समान नागरिक संहिता विधेयक पास होने के बाद कानून बन जाएगा। इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखंड देश में यूसीसी लागू करने वाला आजादी के बाद पहला राज्य होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से पैदा होने वाली अनबन को दूर करना है।

समान नागरिक संहिता के active supporter एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय के मुताबिक, समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने से कई समस्याएं हैं। जैसे कि…

UCC

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1. Bahu Vivaah

कुछ कानून में बहु विवाह यानी कि एक से ज्यादा शादियां करने की छूट है। चूंकि हिंदू, ईसाई और पारसी के लिए दूसरा विवाह अपराध है और सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसलिए कुछ लोग दूसरा विवाह करने के लिए धर्म बदल लेते हैं। समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लगेगी।

2. विवाह की न्यूनतम उम्र

शादी की minimum age कहीं तय तो कहीं तय नहीं है। एक धर्म में छोटी उम्र में भी लड़कियों की शादी हो जाती है। वे शारीरिक व मानसिक रूप से mature नहीं होतीं। जबकि दूसरे धर्मों में लड़कियों के 18 और लड़कों के लिए 21 वर्ष की उम्र लागू है। कानून बनने के बाद लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल तय हो जाएगी।

3. लिव इन रिलेशनशिप

इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद उत्तराखंड में लिव इन रिलेशनशिप का वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन न कराने पर कपल को छह महीने की जेल और 25 हजार का दंड या दोनों हो सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के तौर पर जो रसीद कपल को मिलेगी उसी के आधार पर उन्हें किराए पर घर, हॉस्टल या पीजी मिल सकेगा। यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप को स्पष्ट रूप से बताया गया है। इसके मुताबिक, सिर्फ एक mature पुरुष और mature महिला ही लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे। वे पहले से विवाहित या किसी दूसरे के साथ लिव इन रिलेशनशिप या प्रोहिबिटेड डिग्रीस ऑफ रिलेशनशिप में नहीं होने चाहिए। Registration कराने वाले कपल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या guardian को देनी होगी।

4. विवाह पंजीकरण

कानून लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण यानी marriage registration कराना जरूरी होगा। अगर ऐसा नहीं कराया तो किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।

5. उत्तराधिकारी

एक कानून में मौखिक वसीयत व दान मान्य है। जबकि दूसरे कानूनों में शत प्रतिशत संपत्ति का वसीयत किया जा सकता है। यह धार्मिक या मजहबी विषय नहीं बल्कि सिविल राइट या मानवाधिकार का मामला है। एक कानून में उत्तराधिकार की व्यवस्था बहुत मुश्किल है। पिता की संपत्ति में बेटे व बेटियों के बीच बहुत भेदभाव है। कई धर्मों में शादी के बाद कमाई गई संपत्ति में पत्नी के अधिकार defined नहीं हैं। शादी के बाद बेटियों के पिता की संपत्ति में अधिकार सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। ये undefined हैं। इस कानून के लागू होने के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।

6. बुजुर्ग मां-बाप के भरण-पोषण की पत्नी पर होगी जिम्मेदारी

कानून लागू होने के बाद नौकरीपेशा बेटे की मौत की स्थिति में बुजुर्ग मां-बाप के भरण-पोषण की पत्नी पर जिम्मेदारी होगी। उसे मुआवजा भी मिलेगा। लेकिन पति की मौत की स्थिति में अगर पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा मां-बाप के साथ शेयर किया जाएगा।

7. गोद लेना

कानून लागू होने के बाद राज्य में मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार मिलेगा। गोद लेने की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही अनाथ बच्चों के लिए protection की प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही कानून लागू होने के बाद दंपती के बीच झगड़े के मामलों में उनके बच्चों की कस्टडी उनके दादा-दादी को दी जा सकती है।

8. यूसीसी में तलाक लेने की प्रक्रिया

पति-पत्नी दोनों को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे। तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग-अलग ग्राउंड हैं।

हालांकि UCC से पहले तलाक लेने की process की बात करे तो तीन तलाक झटके में किसी भी माध्यम से तीन बार तलाक बोलकर दिया जा सकता है। इसमें तो कई बार लोग फोन पर मैसेज या कॉल के माध्यम से तलाक दे दिया करते थे। तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन में तलाक की एक प्रक्रिया और निश्चित अवधि होती है। इन दोनों प्रक्रियाओं में पति पत्नी को फैसला लेने के लिए वक्त मिलता है। इसके अलावा मुस्लिम समाज में महिलाओं के तलाक लेने के लिए भी विकल्प है। महिलाएं खुला तलाक ले सकती हैं। कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना कोई महिला खुला तलाक के तहत पति से तलाक लेने की बात कर सकती है। हालांकि इस तरह के तलाक में महिला को मेहर यानी निकाह के समय पति की तरफ से दिए गए पैसे चुकाने होते हैं। साथ ही खुला तलाक में पति की रजामंदी भी जरूरी होती है।

 

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