April 17, 2024

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Loksabha Election 2024: काशी में PM Modi का विपक्ष पर वार, अजय राय के साथ कांटे की होगी टक्कर?

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Ajay-rai-PM Modi

Ajay-rai-PM Modi

Uttar Pradesh News: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी पार्टियों ने तैयारीयां शुरु कर दी हैं। उत्तर-प्रदेश में इंडिया गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग पर भी बात बन गई है। वहीं सपा और कांग्रेस के बीच 17 सीटों पर सहमति बनी है। पीएम मोदी भी काशी से चुनावी रणनीति में जुट गए हैं। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले काशी में विपक्ष ने पक्ष के खिलाफ अजय राय को पीएम के खिलाफ उतारने की नीति बनाई है। उत्तर-प्रदेश का चुनाव इस बार काफी रोचक मोड़ लेने वाला है।

आमने-सामने होंगे

खबरों के मुताबिक वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस एक बार फिर अजय राय को उतार सकती है। आज राय ने बताया कि ”काशी में इस बार मोदी को जमीन दिखा देंगे।” फिलहाल अजय राय वर्तमान में उतर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष भी हैं।

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पांच बार विधायक बने अजय राय

बता दें कि अजय राय पांच बार विधायक रहे चुके हैं। वह 1996, 2002 और 2007 में वाराणसी की कोलासला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे हैं। अजय राय ने 2007 में भाजपा छोड़ने के बाद 2009 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कोलासला में उपचुनाव जीता और चौथी बार विधायक बने थे। फिर 2012 में उन्होंने वाराणसी की पिंडरा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर पांचवीं बार विधायक बने।

जितनी बार लड़े हार मिली

लेकिन अजय राय रे पांच बार विधायक बनने के बाद विधानसभा और लोकसभा के जितने भी चुनाव लड़े, उन सब में हार हाथ लगी। अजय राय 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में वाराणसी सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार थे। उन्हें 2014 में सिर्फ 75,614 वोट मिले और वह 5,05,408 लाख वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। वहीं 2019 में उन्हें 152,548 लाख वोट मिले और उनका मत प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन हार का अंतर और भी ज्यादा बढ़ा। इस बार वह 5,22,116 लाख वोटों के अंतर से चुनाव हारे। फिर 2017 और 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में पिंडरा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे।

वाराणसी से गहरा नाता

अजय राय का वैसै वाराणसी से गहरा नाता है अजय राय का जन्म वाराणसी में घर एक भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ था जो गाजीपुर जिले के मूल निवासी थे। माता का नाम देवी राय और पिता का सुरेंद्र राय था।

आरएसएस से राजनीतिक जीवन की शुरुआत

अजय राय के राजनीतिक जीवन पर चर्चा करें तो उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आरएसएस की छात्र ईकाई एबीवीपी से की थी और सपा में भी रहे। लेकिन 2012 से कांग्रेस के साथ हैं। अजय भूमिहार समुदाय से आते हैं जिस कारणवश वाराणसी की ​पिंडरा (कोलासला सीट के विलय के बाद) विधानसभा सीट पर भूमिहार समुदाय निर्णायक भूमिका में है।

आपराधिक मामलों में भागीदारी

दरअसल अजय राय के खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज है। वर्ष 1994 में कथित तौर पर मुख्तार अंसारी और उनके लोगों ने लहुराबीर इलाके में उनके बड़े भाई अवधेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब से राय और अंसारी परिवार के बीच दुश्मनी चली आ रही है।

गाजीपुर से अफजाल अंसारी को टिकट

एक और जानकारी सामने आ रही है कि सपा द्वारा गाजीपुर से मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को टिकट दिए जाने को लेकर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि, ”निश्चित तौर पर सपा ने उन्हें टिकट दिया है और वह सपा के सिंबल पर लड़ रहे हैं।” अमेठी और रायबरेली सीट पर अजय राय ने कहा कि, ”अमेठी और रायबरेली सीट दोनों ही गांधी परिवार की पारंपरिक सीटें रहीं हैं और गांधी परिवार की ही रहेंगी।”

उत्तर प्रदेश में 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन पर मुहर लग चुकी है। दोनों दलों ने सीट बंटवारा भी कर लिया है, जिसके तहत कांग्रेस 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सपा ने कांग्रेस के के लिए पूर्वांचल और अवध क्षेत्र की 11, बुंदेलखंड की 1 और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 5 सीटें छोड़ी हैं। इनमें रायबरेली, अमेठी, कानपुर, फतेहपुर सीकरी, बांसगांव, सहारनपुर, प्रयागराज, महराजगंज, वाराणसी, अमरोहा, झांसी, बुलदंशहर, गाजियाबाद, मथुरा, सीतापुर, बाराबंकी और देवरिया सीटें शामिल हैं।

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