April 17, 2024

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बच्चों को शिकार बना रहे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, रखें दूर वरना हो जाएगी मुसीबत

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Electronic Gadgets

Electronic Gadgets : आज के समय में बच्चों को फोन से इतना ज्यादा लगाव है कि वो अगर रोने लगें तो उन्हें फोन पकड़ा दो तो वो खुश हो जाते हैं। अक्सर मां-बाप अपना पीछा छुड़ाने के लिए बच्चों को फोन (Mobile Phone) पकड़ा देते हैं और अपने कामों में लग जाते हैं।

यह ट्रेंड आजकल काफी तेजी से बढ़ रहा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो फोन (Electronic Gadgets) आप अपने बच्चों को दे रहे हैं उससे आपके बच्चों पर काफी असर पड़ता है क्योंकि बच्चे कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताने लगते हैं जिससे उन्हें फोन की लत लग जाती है।

वर्चुअल ऑटिज्‍म का बढ़ रहा है खतरा

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दुनिया भर में हुई कई रिसर्च से ये पता चलता है कि कम उम्र में बच्चों को फोन थमाने से उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है. इतना ही नहीं, एक रिपोर्ट यह भी कहती है कि मोबाइल, गैजेट्स और ज्यादा टीवी (Electronic Gadgets) देखने की लत बच्‍चों का भविष्‍य खराब कर रही है। इससे उनमें वर्चुअल ऑटिज्‍म (Virtual Autism) का खतरा बढ़ रहा है। चार से पांच साल तक की उम्र के बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्‍म के लक्षण दिखते हैं।
जिन बच्चों में मोबाइल फोन, टीवी (Television) और कंप्यूटर (Computer) जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (Electronic Gadgets) की लत होती है उनमें ये लक्षण देखे जाते हैं। वर्चुअल ऑटिज्‍म से पीड़ित बच्चे समाज से दूर हो जाते हैं। उन्हें लोगों से मिलने जुलने और बात करने में काफी ज्यादा दिक्कत होती है और इसी परेशानी को वर्चुअल ऑटिज्‍म कहते हैं। बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्‍म होता नहीं है लेकिन उनमें ऐसे लक्षण आ जाते हैं। एक से तीन साल के बच्चों को इसका ज्यादा खतरा होता है।

बच्चों को डाली जा रही है मोबाइल की लत

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अकसर घरों में ये देखने को मिलता है कि जैसे ही बच्चा थोड़ा सा सीखना या चलना शुरू करता है वो फोन के एक्सपोजर (Electronic Gadgets) में आ जाते हैं। सवा साल से लेकर तीन साल की उम्र तक के बच्चों में ऐसा बहुत ज्यादा देखने को मिल रहा है जहां मां-बाप कई बार उनसे दूर रहने के लिए या अपने काम को करने के लिए अपने बच्चों के हाथों में फोन पकड़ा देते हैं।

इसके बाद बच्चों को फोन से इतना लगाव हो जाता है कि उन्हें अकसर फोन ही चाहिए होता है। कई बार मां-बाप अपने बच्चों को कुछ सिखाने के लिए फोन दे देते हैं लो सोचते हैं कि हम बच्चों को पढ़ना सिखा रहे हैं और उन्हें ए, बी, सी, डी सिखा रहे हैं लेकिन सच ये है कि वो बच्चों को पढ़ाने के साथ ही गैजेट्स की लत भी लगा रहे होते हैं।”

बच्चों पर पड़ता है फोन का नकारात्मक असर

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जानकारों की मानें तो बच्चों पर फोन का नकारात्मक असर पड़ता है। उनमें स्पीच डेवलपमेंट नहीं हो पाता है। बच्चे गैजेट्स के संपर्क में आते हैं और वो गैजेट्स (Electronic Gadgets) में ही व्यस्त रहने लगते हैं जिसके कारण उनके व्यवहार में दिक्कतें आने लगती हैं, वो कई बार बहुत नखरे करने लगते हैं। वो कई बार गैजेट्स न मिलने पर चिड़चिड़े और गुस्सैल भी हो जाते हैं। इसके अलावा उनका स्लीप पैटर्न भी खराब हो जाता है।

जानकारों का कहना है कि दो साल तक के बच्चों को मोबाइल और गैजेट्स से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। इसके अलावा 2 से 5 साल तक के बच्चों को भी फोन और गैजेट्स से दूर रखना चाहिए। बच्चों को आप थोड़ा बहुत टीवी दिखा सकते हैं लेकिन ऐसे समय में मां-बाप को उनके पस बैठना चाहिए और समय पर टीवी बंद कर देनी चाहिए ताकि उन्हें टीवी की लत न लग सके।

बच्चों के सामने मोबाइल फोन से बनाएं दूरी

हालांकि बच्चों को इसकी लत से दूर रखने के लिए मां-बाप को भी खुद में बदलाव करना चाहिए। उन्हें फोन एटिकेट्स बेहतर करने होंगे जिसका मतलब है कि बच्चों के सामने मोबाइल फोन से दूरी बनाएं, बच्चों के साथ खुद भी स्पोर्ट्स एक्टिविटीज में भाग लें। उन्हें बाहर लेकर जाएं और अच्छी आदतें सिखाएं।

रिपोर्ट्स की मानें तो देश भर में बच्चों में पिछले एक दशक में वर्चुअल ऑटिज्म के मामलों की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी देखी गई है. अधिकतर मामलों में ये जेनेटिक्स होते हैं लेकिन छोटे बच्चों के बीच मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल समेत कई कारण भी इसकी बड़ी वजह बनकर उभरे हैं। आप सब से निवेदन है कि अपने बच्चों को गैजेट्स (Electronic Gadgets) से दूर रखें और उन्हें अच्छी आदतें सिखाएं।

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