April 16, 2024

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सुप्रिम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी ने पीएम पर कसा तंज, चुनावी बॉन्ड स्कीम को बताया ‘बीजेपी की भ्रष्ट नीति’

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Rahul-Gandhi

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Electoral Bond Scheme: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड की वैधता को आज सुबह रद्द करने के आदेश दिया। इसके बाद से ही इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आना शुरु हो गई। वहीं इस मामले पर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कई आरोप लगाएं हैं।

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इलेक्टोरल बॉन्ड रिश्वत है

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने चुनावी बॉन्ड स्कीम को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट जारी करते हुए लिखा कि, “नरेंद्र मोदी की भ्रष्ट नीतियों का एक और सबूत आपके सामने है। बीजेपी ने इलेक्टोरल बॉन्ड को रिश्वत और कमीशन लेने का माध्यम बना दिया था। आज इस बात पर मुहर लग गई है।”

 

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अन्नदाताओं के साथ अत्याचार

इस मामले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि,“सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार की बहुप्रचारित चुनावी बॉन्ड योजना को संसद द्वारा पारित कानूनों के साथ-साथ भारत के संविधान दोनों का उल्लंघन माना है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।”

जयराम ने आगे लिखा, “अदालत का फैसला नोटों पर वोट की शक्ति को मजबूत करेगा। मोदी सरकार चंदादाताओं को विशेषाधिकार देते हुए अन्नदाताओं पर अत्याचार कर रही है।”

पीएम द्वारा किया गया भ्रष्टाचार

वहीं, कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंधेरे में उजाले की किरण की तरह है। कांग्रेस शुरू से इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के खिलाफ थी। राजनीतिक दलों को मिले चंदे को लेकर लोगों को जानने का अधिकार है। साथ ही एसबीआई अब तक की इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजनिक करे। इलेक्टोरल बॉन्ड का 95% चंदा यानी 5200 करोड़ बीजेपी को मिला है। इसके बदले बीजेपी ने उन कंपनियों को क्या दिया? कांग्रेस को डर है सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए सरकार कोई अध्यादेश न ले आए। आज साफ हो गया कि यह पीएम द्वारा किया गया भ्रष्टाचार है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने इस पर फैसला सुनाते हुए चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ”भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 6 साल पुरानी योजना में दान देने वालों के नामों की जानकारी निर्वाचन आयोग को देने के निर्देश दिए हैं।”

साथ ही कहा कि जानकारी में ”यह भी शामिल होना चाहिए कि किस तारीख को यह बॉन्ड भुनाया गया और इसकी राशि कितनी थी। वहीं पूरा विवरण 6 मार्च तक निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश करना होगा।”

पीठ ने यह भी कहा कि ”चुनाव आयोग को एसबीआई की ओर से साझा की गई जानकारी 13 मार्च तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी।”

 

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