April 19, 2024

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Actor Tom Alter: कौन है वो एक्टर जिसने लिया सचिन तेंदुलकर का पहला इंटरव्यू, इंडियन होने के बाद भी लोग समझते रहे अंग्रेज!

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Actor Tom Alter

Actor Tom Alter

Actor Tom Alter: कहते हैं कि फिल्मी दुनिया में लीड रोल करने के लिए काबीलियत के साथ-साथ शक्ल सूरत भी मायने रखती है। शायद इसीलिए इस एक्टर में टैलेंट होने के बावजूद भी इसे कभी लीड रोल करने का मौका नहीं मिला। और तो और इंडिया के पहले सुपरस्टार जिनके रोल मॉडल हो उनकी एक्टिंग पर तो कोई कैसे ही शक कर सकता है। लेकिन आज भी बहुत से लोग यही मानते हैं कि वो एक फिरंगी एक्टर था, जिसने थोड़ी बहुत हिंदी फिल्में की है। आज हम जिस एक्टर की बात करने वाले हैं वो दिखने में बिल्कुल अंग्रेज लगता है… लेकिन भारत में जन्मा, भारत में पला-बढ़ा शख्स अंग्रेज कैसे हो सकता है? हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं उसका नाम  Tom Alter है।

कहां जन्मे Tom Alter  

Tom Alter का जन्म 22 जून 1950 को भारत के Mussoorie में हुआ था। उनका असली नाम Thomas Beach Alter था। टॉम ऑल्टर तीन भाई-बहन थे। बड़ी बहन मार्था, फिर भाई जॉन, टॉम सबसे छोटे थे। दरअसल, नवंबर, 1916 में टॉम ऑल्टर के दादा-दादी अमेरिका के ओहायो स्टेट से भारत आए थे। सबसे पहले प्लेन से मद्रास आए फिर वहां से ट्रेन से लाहौर पहुंचे। ये लोग मिशनरी थे जो सबसे पहले उन्होंने रावलपिंडी, पेशावर, और सियालकोट इलाके में काम करना शुरू किया था। जी हां, टॉम के पिता की पैदाइश सियालकोट की ही है। आज़ादी के बाद परिवार में भी बंटवारा हुआ और टॉम के दादा-दादी पाकिस्तान में रहे और माता-पिता हिंदुस्तान आ गए। साल 1954 में टॉम के पिता अपने परिवार के साथ राजपुर आ गए। Mussoorie के Woodstock में अपनी प्रायमरी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने हिंदी की शिक्षा ली लेकिन टॉम में जीन्स तो अमेरिकी ही थे। हुआ ये कि उन्हें हिंदी बोलने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। फिर जब टॉम 18 साल के हुए तो वो चले गए higher studies के लिए अमेरिका। लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा। वो वापस इंडिया आ गए और यहां एक स्कूल में टीचर बन गए। सबकुछ बिल्कुल सही चल रहा था, अपना देश, अपना घर और अपनी नौकरी…. एक आम आदमी को और क्या चाहिए होता है? लेकिन टॉम आम तो थे नहीं इसलिए उन्हें ये सब पसंद नहीं आ रहा था। उन्हें अपनी जिंदगी में कुछ अलग करना था और नाम कमाना था।

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राजेश खन्ना के फैन थे टॉम

एक दिन टॉम ने बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार यानी राजेश खन्ना की ब्लॉकबस्टर फिल्म आराधना देखी। फिल्म देखने के बाद वो राजेश खन्ना से काफी प्रभावित हुए और साल 1972 में एक्टिंग सीखने पुणे के Film and Television Institute of India चले गए। आपको बता दें कि यहां उनकी सीनियर थी शबाना आज़मी और उनके जूनियर थे ओम पुरी और नसीरूद्दीन शाह। FTII से निकलने के बाद उन्होंने साल 1976 में अपने करियर की पहली फिल्म की जिसका नाम था साहिब बहादुर जोकि देवानंद स्टारर और चेतन आनंद की directed फिल्म थी। लेकिन कुछ तकनीकि दिक्कतों की वजह से ये फिल्म 1977 में रिलीज़ हुई। इस बीच टॉम ने 1976 में ही रामानंद सागर की फिल्म चरस में भी काम किया जो उसी साल रिलीज़ भी हो गई। इन मुवीज़ में filmmakers ने उनके काम को नोटिस किया जिस वजह से उन्हें उसी साल कई और फिल्मों में काम करने का मौका मिला… जैसे कि शतरंज के खिलाड़ी, हम किसी से कम नहीं, और परवरिश। बता दें कि शतरंज के खिलाड़ी और हम किसी से कम नहीं… इन दोंनो ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और साथ ही इन दो फिल्मों ने कई पुरस्कार भी जीते। टॉम ऑल्टर ने अपने फ़िल्मी सफ़र में 400 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया था। उन्होंने बंगाली, आसामी, गुजराती, तेलुगू और तमिल भाषा की फ़िल्मों में भी काम किया। जैसे कि कन्नेश्वर रामा, ब्रिज भूमि, गाँधी, On wings of fire, पहाड़ी कन्या, अदाज्या, कैलाशे केलेनकारी, और सन् पचहत्तर जैसी ना जाने कितनी ही फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग स्किल से लोंगो का दिल जीता है।

इस बात से खफा रहते थे टॉम

हालांकि टॉम एक बात से अक्सर ख़फा रहते थे कि टॉम ऑल्टर को ज़्यादातर लोग एक गोरा या अंग्रेज़ ही समझते हैं। साल 2017 में दिए एक इंटरव्यू में ऑल्टर ने कहा, ‘मैंने 400 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया, जिसमें से सिर्फ़ 10 में ही अंग्रेज़ का रोल किया है और इसके बावजूद लोग मुझे अंग्रेज़ बुलाते हैं।’ दरअसल, स्टेज और फ़िल्मों में टॉम ऑल्टर ने 55 से ज़्यादा ऐतिहासिक किरदार निभाए। जिनमें से बहादुर शाह ज़फ़र, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, लॉर्ड माउंटबैटन, महात्मा गांधी, मन्टो और मिर्ज़ा ग़ालिब खास है। लेकिन दुख की ही बात है कि इसके बावजूद दर्शक उन्हें अंग्रेज़ ही समझते थे। जैसा कि हमने आपको शुरूआत में बताया था कि टॉम को हिंदी बोलने में काफी दिक्कत होती थी लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब टॉम की हिंदी तो दूर उर्दू का भी कोई तोड़ नहीं था। एक इंटरव्यू में टॉम से पुछा गया कि आप इतनी अच्छी हिंदी कैसे बोल लेते है? इस पर टॉम ने कहा था कि उनका जन्म भारत में हुआ था, इसी वजह से उनकी हिन्दी अच्छी हो गई। ऑल्टर ने ये भी कहा कि पिछले 40 साल से मैं लोगों को यही बता रहा हूं कि मैं इसी देश में पैदा हुआ हूं।

उर्दू के प्रति लगाव

इसके अलावा ऑल्टर का उर्दू के प्रति लगाव किसी से नहीं छिपा था। सत्यजीत रे के ‘शतरंज के खिलाड़ी’ में उन्होंने कैप्टन वेस्टन का रोल किया था। इसमें वो उर्दू शायरी पढ़कर जनरल जेम्स यानी रिचार्ड एटनबोरो को सुनाते नज़र आए थे। ऑल्टर का कहना था कि घर पर अंग्रेज़ी और उर्दू में बात-चीत होती थी। ऑल्टर के शब्दों में कहे तो, ‘उर्दू उनके दिल के करीब है।’
फिर 2002 में थियेटर डायरेक्टर मोहम्मद सैयद आलम और ऑल्टर ‘मौलाना आज़ाद’ प्ले पर काम करने लगे। ऑल्टर को जो स्क्रिप्ट मिली थी वो ‘देवनागरी’ में थी। आलम ने बताया कि ऑल्टर हफ़्ते भर से रिहर्सल कर रहे थे लेकिन खुद को उर्दू में स्क्रिप्ट मांगने से रोक नहीं पाए। ऑल्टर का मानना था कि उर्दू और हिन्दी को रोमन स्क्रिप्ट में नहीं लिखा जा सकता। थियेटर डायरेक्टर मोहम्मद सैयद आलम से वो कहते थे, ‘एक तो हिन्दी और उर्दू रोमन में लिखी ही नहीं जा सकती, और आप लोगों को रोमन में हिन्दी-उर्दू लिखना भी नहीं आता।’

जश्न-ए-रेख्ता में किताब का विमोचन करने से किया इंकार

आलम ने बताया कि ऑल्टर की उर्दू के लिए मोहब्बत इतनी ज़्यादा थी कि एक बार जश्न-ए-रेख़्ता में उन्होंने एक किताब का विमोचन करने से इंकार कर दिया। आलम ने बताया, ‘जब उन्हें पता चला था कि उर्दू की किताब का रोमन ट्रांसलेशन हुआ है वो काफ़ी नाराज़ हुए थे। हम में से कुछ लोगों ने उन्हें मनाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, मैं दोबारा विचार कर सकता था अगर ढंग से रोमन में लिखी गई होती।’

सचिन तेंदुलकर का इंटरव्यू लेने वाले पहले जर्नलिस्ट बने टॉम

खैर, फिल्मों के अलावा टॉम को खेल से बेहद लगाव था। मसूरी के सर्वे ग्राउंड, पोलो ग्राउंड और वुडस्टॉक स्कूल के मैदान में वह अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट और फुटबाल खेला करते थे। यही नहीं मुबंई जाने के बाद भी वह अपने फिल्मी सितारे दोस्तों को मसूरी में टीम बनाकर लाते थे और लोकल प्रतियोगिताओं में खिलाया करते थे। इनमें नसीरुद्दीन शाह, विशाल भारद्वाज जैसे नाम शामिल हैं। खास बात तो ये है कि उन्होंने मुबंई में कुछ समय खेल पत्रकार के रूप में भी काम किया। और क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी इंटरव्यू लेने का श्रेय भी टॉम को ही जाता है। उस वक्त सचिन महज़ 15 साल के थे।

टॉम का निजी जीवन

अब टॉम के नीजी जीवन की बात करे तो परिवार में इनकी पत्नी कैरल, बेटा जेमी और बेटी अफशां हैं। फिर साल 2008 में टॉम ऑल्टर को हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। टॉम ऑल्टर की आखिरी फिल्म एक शॉर्ट फिल्म थी जोकि उनकी मौत के 2 साल बाद रिलीज हुई थी, जिसका नाम किताब है। टॉम को एक बात का अफसोस हमेशा रहा कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में हर किरदार किए लेकिन कभी लीड रोल नहीं मिला। इसी अफसोस के साथ 29 सितंबर, 2017 को टॉम ऑल्टर ने स्किन कैंसर से पीड़ित होने के कारण मुंबई में आखिरी सांस ली।

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