April 20, 2024

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गाजियाबाद के निवासियों की मेट्रो की मांग, रोप वे बनाने के फैसले के ऊपर जताई नाराजगी

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Ghaziabad Ropeway Project

Ghaziabad Ropeway Project

Ghaziabad Ropeway Project: गाजियाबाद में ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या है. वैशाली मेट्रो और मोहननगर के बीच रोजाना लोगों को काफी देर तक ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब उस ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए सरकार ने एक नई पहल की है. परन्तु सवाल यहां पर आ कर फंस गया है कि मेट्रो या रोप-वे ?.

जनता पर जबर्दस्ती थोपे सरकार अपना फैसला

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा ब्लू और रेड लाइन को जोड़ने के लिए रोप-वे यानी ट्रॉली सेवा (Ghaziabad Ropeway Project) शुरू करने का फैसला लिया गया है. 487 करोड़ रुपये बजट वाले इस प्रोजेक्ट को साल 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि, स्थानीय लोग इसके विरोध में है. लोगों कि मांग रोप-वे के बजाए मेट्रो बनाने की है. और उनका कहना है कि सरकार हमारे ऊपर अपना फैसला नहीं थोप सकती हैं.

सरकार के फैसले से खुश नहीं हैं जनता

Ghaziabad Ropeway Project

इसी कड़ी में आज हमने उदय भान गर्ग, अध्यक्ष, वसुंधरा विकास समिति से बात की है जिन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के जिलाधिकार और अन्य प्राधिकरण को पत्र लिखकर इस संदर्भ में ज्ञापन सौपा था.

जिसका जवाब देते हुए सरकार ने हमें ही रोप-वे (Ghaziabad Ropeway Project) के फायदे गिनवा दिए. लेकिन, हमारा मानना है कि योजनाएं तो जनता के हित में और उनकी सुविधाओं के लिए होती हैं. तो, ये कैसी योजना सरकार बना रही है, जिससे जनता ही खुश नहीं है. हमने अभी तक हड़ताल, कैंडल मार्च, धरना और आंदोलन सब किया है. लेकिन, सरकार ने हमारी बात पर गौर नहीं किया और अगर अब भी सरकार हमारी बात नहीं मानेगी तो हम पद यात्रा और भूख हड़ताल भी करेंगे.

रोप-वे से होगी तमाम परेशानियाँ

Ghaziabad Ropeway Project

इस कड़ी में उदय भान गर्ग ने आगे कहा, मेट्रो से लोगों को आने-जाने में आसानी होगी, जो की आरामदायक भी हैं. और, जो सुविधा मेट्रो हमे देती है क्या वो रोप-वे (Ghaziabad Ropeway Project) से हमे मिल पाएगी ?. बरसात, आंधी- तूफान और बिजली गुल में अगर कोई रोप वे के अन्दर फंस गया तो उसे कैसे बचाया जाएगा ?. इतनी उच्चाई पर अगर किसी को कोई परेशानी हो गई तो कैसे उस तक जरुरत की चिकित्सा सहायता पहुंचाई जाएगी ?.

और, अगर मेट्रो की लागत की बात है तो, जब सरकार दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में मेट्रो के लिए रकम जुटा सकती हैं तो गाजियाबाद में क्यों नहीं ?. बता दें कि, साल 2017 से पहले, मेट्रो का रेवन्यू शेयर इस तरफ विभाजित होता था, 50% रकम केंद्र, 20% प्रशासन और 30% राज्यों को मिलता था. गाजियाबाद में मेट्रो के बनने से लोग उन राज्यों में भी आसानी से जा सकेगें, जिन में उन्हें सड़क के रास्ते से जाने में कई घंटे लगते हैं तथा मेट्रो बनने से डीएमआरसी को भी आर्थिक फायदा होगा.

मेट्रो के लिए 7000 से ज्यादा लोगों ने दिया अपना मत

Ghaziabad Ropeway Project

वसुंधरा निवासी समाजसेवी, अमित किशोर से भी हमने इस मामले को लेकर खास बातचीत की. अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि, प्रशासन व जीडीए जबर्दस्ती स्थानीय लोगों पर रोप-वे प्रोजेक्ट नहीं थोप सकती है. रोप-वे (Ghaziabad Ropeway Project) से हम सामान के साथ यात्रा नहीं कर पाएगें तथा जिन लोगों को ऊंचाई से डर लगता है वो कैसे इस में सफ़र कर पाएगें. एवं, एक बार में जितने यात्री मेट्रो में सफ़र कर सकते हैं क्या उतने रोप-वे में कर पाएगें ?. गर्मी के मौसम के समय लोगों को रोप-वे में काफी परेशानी होगी, जो कि मेट्रो में नहीं होती हैं.

हम लोग मई माह से आंदोलन कर रहें हैं. लेकिन, अभी तक सरकार ने हमारी बात पर ध्यान नहीं दिया है. और, अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम कुछ ही समय बाद भूख हड़ताल पर भी बैठेगें. बता दें कि इस आंदोलन में हमारे साथ 7000 लोगों का साथ हैं, हमने एक बुक्लिट तैयार की है, जिसमें उन सभी 7000 लोगों के हस्ताक्षर है. इस मेट्रो से साहिबाबाद, अर्थला गांव और कड़कड़ गांव को भी फायदा होगा.

जनता के ही लिए जनता का पैसा

Ghaziabad Ropeway Project

Ghaziabad Ropeway Project: इसी कड़ी में हमने देव कुमार सेंगर से भी बात की हैं. उनका कहना हैं कि, सरकार के पास तमाम योजनओं के लिए पैसे हैं लेकिन मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बजट नहीं होने की बात कर रहे हैं . यह कैसे संभव है? क्योंकि, इस साल सरकार को उत्तर प्रदेश के लिए कुल 6,15,518.97 करोड़ रूपए का बजट मिला है.  हम लोगों ने सरकार के समक्ष रखे प्रस्ताव में इस प्रोजेक्ट में लगाने के लिए जनता से पैसे इक्कठा करनें की बात कही. लेकिन, सरकार ने इसे भी खारिज कर दिया.

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