March 2, 2024

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Manipur के विद्रोहियों ने डाले हथियार, अमित शाह बोले “है ऐतिहासिक पल”

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Manipur: मणिपुर से बुधवार को कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आईं, जो पूर्वोत्तर के राज्य में शांति स्थापित करने की दिशा में काफी अहम मानी जा रही हैं। इन तस्वीरों में सैकड़ों विद्रोही हथियार डालते नजर आ रहे हैं। ये विद्रोही मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी गुट यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) के हैं।

शांति समझौते पर हस्ताक्षर

UNLF ने बुधवार को सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और हिंसा छोड़ने पर सहमति व्यक्त की। UNLF ने ऐसे वक्त पर हथियार डाले, जब गृह मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) पर पांच सालों का प्रतिबंध बढ़ाया था। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत UNLF पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है।

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सबसे पुराना उग्रवादी संगठन

म्यांमार में सेना के खिलाफ चल रहे विद्रोह के बाद से UNLF बैकफुट पर है। UNLF का गठन 24 नवंबर 1964 को हुआ था। यह मणिपुर का सबसे पुराना उग्रवादी संगठन है। इसका गठन अरेंबम सैमेंद्र के नेतृत्व में भारत से अलग होने की मांग के साथ किया गया था। यह मैतेई विद्रोही समूह है। 1990 में UNLF ने भारत से मणिपुर को अलग करने के लिए सशस्त्र संघर्ष भी शुरू किया था।

साल 2000 में सैमेंद्र की हत्या के बाद, यूएनएलएफ का नेतृत्व आर के मेघेन ने किया। 2010 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद इस संगठन की कमान खुंडोंगबाम पामबेई के पास आ गई। हालांकि, UNLF में कई बार टूट भी हुई।

मणिपुर की हिंसक कहानी

मणिपुर में 3 मई से हिंसा जारी है। इस हिंसा के मध्य में मैतेई और कुकी समाज है। मैतेई समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा मांग रहा है। मणिपुर हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन ने 20 अप्रैल को इस मामले में एक आदेश दिया था। इस आदेश में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर विचार करने को कहा था।

कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ 3 मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने ‘आदिवासी एकता मार्च’ निकाला था। ये रैली मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ निकाली गई थी। इसी रैली के दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हो गई।

180 की मौत 50 हजार से ज्यादा बेघर

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इसके बाद से राज्य में हिंसा की घटनाएं होने लगी। लेकिन अब स्थिति काबू में है। अब तक 180 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, हजारों घरों को जला दिया गया। हिंसा में अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं। ये लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।

उठाया ऐतिहासिक कदम

मणिपुर की कुल आबादी 28.55 लाख है। UNLF के हथियार डालने से पूर्वोत्तर के राज्य में अब शांति लौटने की उम्मीद है। यूएनएलएफ अपने सशस्त्र आंदोलनों को संचालित करने के लिए जबरन वसूली, हथियार व्यापार और बड़े प्रोजेक्ट से वसूली करता था, लेकिन अब इस संगठन के हथियार डालने को मणिपुर में शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है।

ऐतिहासिक मील का पत्थर है

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, ‘‘एक ऐतिहासिक मील का पत्थर. पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मोदी सरकार के प्रयासों ने एक नया अध्याय जोड़ा है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने आज नई दिल्ली में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।  मणिपुर का सबसे पुराना घाटी स्थित सशस्त्र समूह यूएनएलएफ, हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

 

 

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