April 17, 2024

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Indians: भारतीय लोग खान-पान के आलावा इन चीजों पर कर रहे खर्चा, जानें कितना है मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च?

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Inidian's

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Indian’s Spending: भारत में एक सरकारी सर्वे हुआ जिसमें पता चला कि भारतीयों के कुल घरेलू खर्च में बीते 10 सालों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वहीं सांख्यिकी मंत्रालय ने भारतीय परिवारों के घरेलू खर्च को लेकर एक रिपोर्ट भी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार लोग आजकल खाने-पीने के आलावा घरेलू खर्च में पैसे ज्यादा खर्चा करने लगे हैं।

कपड़े और एंटरटेनमेंट पर ज्यादा खर्चा बढ़ा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारतीय परिवारों में घरेलू खर्च पिछले दस सालों में दोगुने से भी अधिक बढ़ा है। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि भारतीय अपने घरों में खाने-पीने के सामानों में कम खर्च कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की जारी इस रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों से जानकारी मिली है कि अब भारतीय कपड़े, टेलीविजन सेट और एंटरटेनमेंट से जुड़ी चीजों पर ज्यादा खर्च करने लगे हैं।

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पूरे एक दशक की रिपोर्ट

बता दें कि रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों में पूरे एक दशक की तुलना की गई है। देखा जाए तो गांव के इलाकों में हर महीने होने वाले खर्च में खाने पीने की हिस्सेदारी 2011-12 की तुलना में 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 46.4 प्रतिशत हो गई है। इसके तहत अगर शहरी क्षेत्रों की बात करें तो वहां के खर्च में खान-पान को लेकर हिस्सेदारी 42.6 प्रतिशत से कम हो गई है जो कि अब 39.2 प्रतिशत ही रह गई है।

भोजन के बजाय गैर-खाद्य सामानों की खरीदारी बढ़ी

सर्वे में यह सामने आया है कि भोजन के बजाय लोग गैर-खाद्य सामानों की खरीदारी शहरी क्षेत्रों में 57.4 प्रतिशत से बढ़कर 60.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 47 प्रतिशत से बढ़कर 53.6 प्रतिशत हो गई है।

शहरी क्षेत्रों में मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च

यह सरकारी सर्वे अगस्त 2022 से जुलाई 2023 के बीच किया गया था। लोगों के कुल खर्च में हुई बढ़ोतरी का पता इस बात से चला है कि शहरी क्षेत्रों में औसतन मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च बढ़कर अनुमानित 6,459 रुपये हो गया है, जो 2011-12 में करीब 2,630 रुपये था।

ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता खर्च

इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में आंकड़ा 1,430 रुपये से बढ़कर अनुमानित 3,773 रुपये हो गया है। इस हिसाब से देखा जाए तो पिछले 11 वर्षों में खाने-पीने से लेकर तमाम तरह की चीजों और सेवाओं पर प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च ढाई गुना तक बढ़ा है।

वस्तुओं को दोबारा समायोजित करने के लिए

इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि भोजन के आलावा यात्रा और अन्य चीजों पर खर्च में ज्यादा इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि ये कंज्यूमर सर्वे भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इससे अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में हो रहे उतार-चढ़ाव का पता चलता है। सरकार इस डाटा का उपयोग रिटेल महंगाई और जीडीपी की गणना के लिए इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं को दोबारा समायोजित करने के लिए भी किया जाता है।

 

 

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