April 15, 2024

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किसानों के सामने सरकार का पांच वर्षीय प्रस्ताव, बात नहीं बनी तो फिर करेंगे प्रदर्शन

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Farmer

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Farmer Protest: रविवार शाम को चंडीगढ़ में शुरू हुई चौथे दौर की बातचीत देर रात शांतिपूर्ण माहौल में समाप्त हुई। केंद्रीय मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच हुई वार्ता में सरकार ने एनसीसीएफ और नाफेड को एमएसपी पर किसानों के साथ पांच साल का समझौता करने का प्रस्ताव दिया है।

वहीं इस बैठक में केंद्र की तरफ से तीन मंत्री- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने किसानों संग शामिल हुए।

पांच साल का समझौता प्रस्ताव

दरसल बैठक समाप्त होने के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ”किसानों के साथ वार्ता सद्भावनापूर्ण माहौल में हुईं। उन्होंने आगे कहा कि, “हमने सहकारी समितियों एनसीसीएफ और नाफेड को एमएसपी पर दालें खरीदने के लिए किसानों के साथ पांच साल का समझौता करने का प्रस्ताव दिया है।”

इसके अलावा भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा एमएसपी पर कपास की फसल खरीदने के लिए किसानों के साथ पांच साल का समझौता करने का प्रस्ताव दिया गया है। किसान नेताओं ने कहा है कि ”सरकार के प्रस्तावों पर अपने निर्णय के बारे में सोमवार तक जानकारी देंगे।”

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सरकार द्वारा दिए गए प्रस्तावों की सूची

सरकार चार फसलों पर पांच साल के लिए एमएसपी देने को तैयार है। किसानों को पांच साल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी एजेंसियों द्वारा दालों, मक्का और कपास की फसलों की खरीद का प्रस्ताव दिया है।

एनसीसीएफ (राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ) और नैफेड (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ) जैसी सहकारी समितियां उन किसानों के साथ अनुबंध करेंगी जो ‘अरहर दाल’, ‘उड़द दाल’, ‘मसूर दाल’ या मक्का उगाते हैं। अगले पांच वर्षों तक उनकी फसल एमएसपी पर खरीदी जाएगी।

खरीद की मात्रा (Quantity) पर कोई तय सीमा नहीं होगी और इसके लिए एक पोर्टल बनाया जाएगा। इसके तहत अलग-अलग फसलों के उत्पादन से पंजाब की खेती बचेगी, भूजल स्तर में सुधार होगा और भूमि को बंजर होने से बचाया जाएगा।

दो दिन का समय मांगा

केंद्र के प्रस्ताव पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, ” हम 19-20 फरवरी को अपने मंचों पर चर्चा करेंगे और इस बारे में विशेषज्ञों की राय लेंगे और उसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे।”

पंधेर ने आगे कहा, ”कर्ज माफी और अन्य मांगों पर चर्चा लंबित है और हमें उम्मीद है कि अगले दो दिनों में इनका समाधान हो जाएगा।”

किसानों दवारा की गई मांगे

किसानों ने सरकार के सामने मांग रखी की एमएसपी की कानूनी गारंटी दें। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना होगा। साथ ही किसानों और खेत में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेंशन की मांग रखी। कृषि ऋण माफ हो। बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी न हो।

2021 के लखीमपुर खीरी की हिंसा पीड़ितों को न्याय मिले।भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली और 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा मिले।

यात्रियों के लिए टोल बैरियरों फ्री

एसकेएम के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि ”वे मंगलवार से गुरुवार तक सांसदों, विधायकों और जिला अध्यक्षों सहित पंजाब भाजपा नेताओं के आवासों के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे। ”यह भी निर्णय लिया गया है कि वे राज्य के सभी टोल बैरियरों पर विरोध प्रदर्शन होगा और इसके तहत 20 से 22 फरवरी तक सभी यात्रियों के लिए इसे फ्री कर दिया जाएगा।”

सी-2 प्लस 50 प्रतिशत फॉर्मूले की मांग

राजेवाल ने आग कहा कि ”एसकेएम, एमएसपी के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में अनुशंसित सी-2 प्लस 50 प्रतिशत फॉर्मूले से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेगा।”

किसानों का समर्थन मांगा

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी और कुछ ‘खापों’ ने पंजाब के प्रदर्शनकारी से बात करते हुए कहा था कि ”आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए सभी किसान संगठनों को एकजुट करने का निर्णय लिया गया है।”

किसानों की मांग स्वीकार हो

इससे पहले, किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि था कि ”केंद्र सरकार को जरा भी देरी नहीं करनी चाहिए और लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले किसानों की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए।”

आचार संहिता से पहले समाधान ढूंढे

दल्लेवाल ने आगे कहा, ”अगर सरकार सोचती है कि वह आदर्श आचार संहिता लागू होने तक बैठक करती रहेगी और फिर कहती है कि वह कुछ नहीं कर सकती क्योंकि आचार संहिता लागू है तो किसान वापस नहीं लौटने वाले हैं। आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार को हमारी मांगों का हल निकालना होगा।”

फिर से प्रदर्शन की तैयारी

बता दें कि दिल्ली चलो मार्च फिलहाल रुका हुआ है, लेकिन 21 फरवरी को सुबह 11 बजे फिर से शुरू होगा। दरअसल चौथे दौर की वार्ता से पहले, एसकेएम के नेताओं ने यह घोषणा की थी कि ”वह केंद्र से अपनी मांगें मनाने के लिए मंगलवार से अगले तीन दिन तक पंजाब में भाजपा नेताओं के आवासों का घेराव करेगा।”

मुद्दा फिलहाल सुलझा नहीं है। केंद्रीय मंत्रियों और किसान नेताओं की इससे पहले 8, 12 और 15 फरवरी को मुलाकात हुई थी लेकिन बातचीत का कोई हल नहीं निकला। किसान 13 फरवरी से हरियाणा-पंजाब सीमा पर शंभू और खनौरी बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं, जबकी किसानों के दिल्ली चलो मार्च को पुलिस ने रोका हुआ है।

 

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