April 14, 2024

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किसानों ने ठुकराया सरकार का प्रस्ताव, कल से फिर होगा आंदोलन, प्रस्ताव को बताया साजिश

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Farmer

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Farmer Protest: केंद्र सरकार की तरफ से की गई किसानों के साथ चौथी वार्ता भी फेल हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार के एमएसपी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से एमएसपी पर पांच साल के कॉन्ट्रेक्ट प्रस्ताव का आश्वासन दिया गया था। लेकिन किसानों द्वारा आए बयानों से यह पता चला है कि उन्हें लगता है कि केंद्र सरकार एमएसपी पर अध्यादेश लाने की योजना बना रही है।

 केंद्र सरकार की अध्यादेश योजना

बता दें कि किसानों ने केंद्र सरकार के फैसले पर अपनी राय देते हुए कहा है कि ” केंद्र सरकार A2+FL+50% के आधार पर एमएसपी पर अध्यादेश लाने की योजना बना रही है। किसानों को C2+50% से नीचे कुछ भी स्वीकार नहीं है।”

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पांच साल का कॉन्ट्रेक्ट प्रस्ताव

सरकार के द्वारा किसानों के सामने मक्का, कपास, अरहर/तूर, मसूर और उड़द समेत पांच फसलों की खरीद को लेकर पांच साल के कॉन्ट्रेक्ट का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, किसान मोर्चा ने अपनी बात स्पष्ट रखते हुए कहा है कि वे सी2+50% के फॉर्मूले के आधार पर ही एमएसपी की गारंटी चाहते हैं। किसान मोर्चा ने एक बयान में यह भी कहा कि बीजेपी ने खुद 2014 के चुनाव में अपने घोषणापत्र में इसका वादा किया था।

प्रधानमंत्री ईमानदारी से सच बताएं

किसान मोर्चा ने आगे कहा है कि ‘‘स्वानिथान आयोग की 2006 की रिपोर्ट में केंद्र सरकार को C2+50% पर किसानों को एमएसपी देने का सुझाव दिया गया था।”  किसानों का कहना है कि ”वह इसी रिपोर्ट के आधार पर तमाम फसलों पर वह एमएसपी की गारंटी चाहते हैं। जिसके तहत किसान अपनी फसल एक फिक्स्ड कीमत पर बेच सकेंगे और उन्हें कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।”  मोर्चा ने कहा कि ”अगर मोदी सरकार बीजेपी के वादे को लागू नहीं कर पा रही है तो प्रधानमंत्री ईमानदारी से जनता को बताएं।

लोकतांत्रिक संस्कृति के खिलाफ

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि ” केंद्रीय मंत्री यह सच बताने को तैयार नहीं हैं कि उनके द्वारा प्रस्तावित एमएसपी A2+FL+50% पर आधारित है या C2+50% पर चर्चा में कोई पारदर्शिता नहीं है जबकि चार बार चर्चा हो चुकी है। यह दिल्ली सीमाओं पर 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान एसकेएम द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक संस्कृति के खिलाफ है।”

किसानों पर क्रूर दमन समाप्त करें

मोर्चा में आगे कहा गया है कि ”किसानों के संघर्ष को तेज करने के लिए, मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों और कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार को जनता के बीच उजागर करने के लिए, पंजाब की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों पर “क्रूर दमन” को समाप्त करने की मांग है।”

एसकेएम द्वारा की गई मांगे

एसकेएम ने केंद्रीय मंत्रियों से यह मांग की है कि ”मोदी सरकार ऋण माफी, सार्वजनिक क्षेत्र की फसल बीमा योजना, बिजली का निजीकरण नहीं करने, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को 10000 रुपये मासिक पेंशन, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की भी मांग की है।”

 

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